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Tuesday, May 2, 2017

मया के " छंईहा "

मया के " छंईहा "
"घाम जनावत हे"
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सुरसुर सुरसुर गरम हवा
घाम ह जनावत हे
तरिया नदिया कुंआ बवली
पानी हर अटावत हे

अमरईया के छंईहा नईहे
रुख राई कटागे
डारा पतौना सबो झरगे
हवा गरेरा म उड़ागे

चट ले जरत हे भोंमरा
घाम ह जनावत हे
मुंड़ म टोपी गमछा चश्मा
पहिर के ईतरावत हे

गरमी ले राहत पाय बर
पंखा कुलर चलावत हे
गरमी म होके हलाकान
बिजली बिल बढ़ावत हे

एक बेर के नहाईय्या
तीन तीन बेर नहावत हे
गांव के तरिया डबरी ल
डुबक डुबक मतलावत हे

गरमी थिराय बर ठंडा पानी
मन भरके पियत हे
गांव ले लोग लईका मन
बरफ कुल्फी चुहकत हे

चिरई चिरगुन गाय गरवा
छँईया पाय बर तरसत हे
मंझनि मंझानिया सुरुज देव
आगि बरोबर तपत हे

chhattisgarhi Rajbhasha